सहनशीलता , मर्यादा,लोकलाज ,भावुकता,स्नेह, करुणाऔर न जाने क्या- क्यासदियों से ढूँढा गया क्यों उनमें हीइनका होना ही परिभाषा बना स्त्री कासच है गर ये परिभाषातो हर पुरूष को चाहिएबन जाए वो भी स्त्री