ये पैगाम है उस खिलते हुए गुलाब के नाम

जिसके निकलने पर चमन में बहार आ जाती है

कातिल निगाहें जिसकी सूने दिल को मेरे धड़का जाती है

जिसकी एक मुस्कान से सारा जहाँ खिल उठता है

जिसके गाने पर रोम रोम मेरा मचलने लगता है

जिसकी खूबसूरती देख चाँद भी जल जाता है

अपनी परछाई में मुझे अक्स उसका नजर आता है

जिसके साथ होने पर कुछ नही बोल पाता हूँ

दो वक़्त की दूरी भी अब उस से सह नही पाता हूँ

उम्र भर के लिये जिसे अपना बनाना चाहता

अब तो पूरी जिंदगी उस के नाम कर जाता हूँ