उस रूप को मैं तेरे निहारता रहा जिसे चाँद ने अपनी रोशनी से चमकाया है उन ज़ुल्फों को मैं तेरी सँवरता रहा जिस की खूशबू ने चमन को महकाया है उन निगाहों से मैं तेरी कहता रहा जिस ने इशारों में हमें कुछ समझाया है उन लबों को मैं तेरी छूता रहा जिस से गुलाब ने भी रंग अपना चुराया है उस धड़कन को मैं तेरी सुनता रहा जिस को दिल तेरा न काबू कर पाया है उन हाथों को मैं तेरे थामे रहा जिस में जन्नत को हमने अपनी पाया है उन साँसों को मैं तेरी गिनता रहा जिस को मरते दम तक न हमने भूलाया है उस रूह को मैं तेरी जलाता रहा जिस ने दो जिस्मों को एक जान में बसाया है