हर रोज तेरे चेहरे की चाँदनी का दीदार करूँ तेरे हर लफ़्ज़ को गीत के धागों में पिरौऊँ तेरी खामोश निगाहों में देखने की मैं खता करूँ तुझसे हो कोई राबता ऐसी मैं रब से दुआ करूँ