1 min read 805.6K reads

राबता


हर रोज तेरे चेहरे की चाँदनी का दीदार करूँ तेरे हर लफ़्ज़ को गीत के धागों में पिरौऊँ तेरी खामोश निगाहों में देखने की मैं खता करूँ तुझसे हो कोई राबता ऐसी मैं रब से दुआ करूँ

Read more Earn more Learn more