सुबह जिस चेहरे को देख दिन की शुरुआत करता हूँ और... ख़्वाबों में जिस चेहरे को बार बार याद करता हूँ प्यार तो मैं दोनों से करता हूँ   जिस के पास न होने पे सहम सा जाता हूँ और... जिस के दूर जाने पे बेचैन हो जाता हूँ प्यार तो मैं दोनों से करता हूँ   जिस के मनाने पे भी बार बार रूठ जाता हूँ और... जिस के रूठ जाने पे दिन भर मनाता फिरता हूँ प्यार तो मैं दोनों से करता हूँ   जिस की गोद में सिर रख सब गम भूल जाता हूँ और... जिस के हर गम को अपना बना लेता हूँ प्यार तो मैं दोनों से करता हूँ   जिस के बालों को धूप मे छांव बनाता हूँ और... जिस के बालों को सहलाते सहलाते ख़यालों में खो जाता हूँ प्यार तो मैं दोनों से करता हूँ   जिस की मुस्कान के लिए जी जान लगा देता हूँ और... जिस की मुस्कान पर मर मिटने की ख़्वाहिश रखता हूँ प्यार तो मैं दोनों से करता हूँ   जिस के बताए राह पर मैं चल जाता हूँ और...जिस को मंज़िल मान कर खुद राही बन जाता हूँ प्यार तो मैं दोनों से करता हूँ   जिस की आँखों का मैं तारा बन जाता हूँ और... जिस के कदमों में चाँद तारें लाना चाहता हूँ प्यार तो मैं दोनों से करता हूँ   जिस से जनम से ही जुड़ जाता हूँ और... जिस का जनम जनम के लिए बनना चाहता हूँ प्यार तो मैं दोनों से करता हूँ