ख़्वाबों में डूब जाना और ख़यालों में खो जाना
तेरे चेहरे के सामने... अपना वजूद भूल जाना
एक छोटी सी उमर में क्या क्या कर गए हम
जुबां से ना बोल पाना और सुन कर भी समझ ना आना
दिल में तेरे आने पर... अपनी धड़कन को भूल जाना
एक छोटी सी उमर में क्या क्या कर गए हम
पास भी ना आ पाना और दूर रह के भी ना रह पाना
तेरी एक मुस्कान पर... अपने दर्द को भूल जाना
एक छोटी सी उमर में क्या क्या कर गए हम
यादों से जुदा ना हो पाना और बातों का हमेशा याद आना
तेरी हर एक मुलाक़ात को... भूल कर भी भूला ना पाना
एक छोटी सी उमर में क्या क्या कर गए हम
नजर से ना उतार पाना और ना नफस से अलग कर पाना
तुझसे मिलने की उम्मीद में... जमाने को भूल जाना
एक छोटी सी उमर में क्या क्या कर गए हम