बचपन में अपनी गोद में रख कर जो हमें दुलारता है
कांधे पर चढ़ा कर हमें जो पूरा दिन घूमाता है
जिसके पीठ पर बैठ हम सारा घर घूम आते हैं
और.. मजबूत हाथ जिसके हमें सहारा दे जाते हैं
जो ज़िंदगी भर हमें सच का पाठ पढ़ाता है
झूठ को जो हमारे जो आसानी से समझ जाता है
कभी दोस्त बन कर रंगीन शाम के अफसाने सुनाता है
तो कभी.. ज़िंदगी को जीने का तरीका सीखा जाता है
चेहरे पर हमारे मुस्कान को देख जो अपनी थकान मिटाता है
हमारे सपनों को पूरा करने की जो ज़िम्मेदारी निभाता है
जो दिन भर मेहनत कर रात को हमें चैन की नींद सुलाता है
और.. इच्छाओं को हमारी जो अपनी खुशियाँ काट कर पूरी कर जाता है
जिस के चेहरे की झलक हम में दिखती है
जिसकी कई आदतें भी हम से मिलती जुलती है
जो हमारी हर सफलता को अपना मान कर जश्न मनाता है
और.. असफल होने पर हमें अपने पैरों पर खड़े कराता है
हमारी तारीफ़ें सुन जिस का सिर गर्व से उठ जाता है
जो हमें हर मुश्किल से निपटने का हुनर दे जाता है
जिसका नाम ही इस दुनिया में हमारी पहचान कराता है
ऐसे ही पिता शब्द को वो सार्थक बना जाता है