कल से सिरहाने लिए तुम्हारी तस्वीर बैठा हूँ
बस कल से ही तुम्हारी याद आई है
बस कल से मौसम ने भी रंग बदला है
बस कल से दीवारों ने भी सीलन खाई है
बस कल से उम्र का सब लिहाज टूट गया है
बस कल से तुम्हारे इंतज़ार में अखिया सरमाई है
बस कल से चौखट पर आस का दिया जलाए बैठा हूँ
बस कल से नैन के दरवाजे पर एक दस्तक पाई है
बस कल से कुछ अपना कुछ पराया बाटा है
बस कल से एक पगली दिल पर छाई है
बस कल से सब ठोर ठिकाना भूला हूँ
बस कल से यादों की गहरी खाई है
बस कल से.....