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स्वर्णिम भोर


नई स्वर्णिम किरन बिखरी, नवल सी चेतना लेकर।नया आगाज़ है नभ पर, नया श्रृंगार धरती पर।समंदर मुस्कुराहट का, नदी हो भावनाओं की,क्षितिज के रंग से किसलय,निखरता ओंस सा निर्झर।

@kalpna

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