मुझसे मेरे होने का सबूत मांग लिया,
आख़िर क्यूँ तुमने जीने का वज़ूद मांग लिया,
अपने ग़ुलाबी बसंत को तपती जेठ की दुपहरिया बनाकर,
हमने तो बस सेवा की निःस्वार्थ, आज बगीचे की रखवाली को माली लगा लिया।

#क़लम✍
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