जिन्हें देखकर जीने की आदत थी,
अब उनके बिना ही जीना मजबूरी है,
देखकर हमें लोग बाग़ कहते हैं ऐसा,
हालत मेरी कुछ बिगड़ी कुछ सुधरी है।