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क़लम


क्यूँ संदूक को खंगाला जाए,क्यूँ वो पैग़ाम निकाला जाए,

जिंदा होना भी जुनून ही तो है,क्यूँ बहलाने को मन कोई भ्रम पाला जाए।

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