दिन भर मैं ख़ुद को बिताता हूँ,
हर रात अकेला हो जाता हूँ,
बड़ी सँकरी हैं गलियां इश्क़ की,
अब तो ख़ुद ही में खो जाता हूँ।

#क़लम✍
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