उस रात ने दुश्मनों को भी गले मिलते देखा था एक साथ सड़क पर नाचते देखा था सड़के सारी रात आबाद रहीं लेकिन सड़कों पर न हिन्दू दिखे,न मुसलमान न सिक्ख,न ईसाई न अमीर,न ग़रीब चारों तरफ़ सिर्फ़ और सिर्फ़ कुछ पागल हिंदुस्तानी खुशी से नाच रहे थे मैंने 'सपनों का भारत' देखा तो नहीं लेकिन जब भी 'सपनों के भारत' की बात होती है मुझे वो रात बहुत याद आती है और वो एक रात तुम्हारी बदौलत थी