चलो आज फ़िर से बच्चे बन जाते है।
नंगे पाव दौड़ते हैं,धुल उड़ाते है।
माँ से दांट खा के माँ से ही चिपक जाते है
और रोते हुए उसकी ही गोद मे सो जाते हैं।
चलो आज फ़िर से बच्चे बन जाते है।
बिना कुछ सोचे रूठे हुए दोस्त को मनाते है।
कुछ पल के लिये अहम को भूल जाते है।
तपती धूप मे छत पे जाके पतंग उड़ाते है।
और चुपके से पड़ोसी के घर से बेर तोड़ लाते है।
चलो आज फ़िर से बच्चे बन जाते है।
तितलियों को देखकर खुश हो जाते हैं ।
इस शोर गुल से दूर हो जाते हैं।
खुद से ही बातें करते है।
और खुलकर मुस्कुराते हैं।
चलो आज फ़िर से बच्चे बन जाते है।
~आस्था


