बचपन था तो सोचते थे कब बड़े हो जाएं|
बड़े हुए तो सोचते हैं बचपन लौट आए||
बचपन में घर-घर खेला गुड़िया को सजाएं|
उनकी जगह आ गई अब चिंता और समस्याएं||
बचपन में तो खेलते थे शौक से छुपन छुपाए|
अब छुपना चाहे तो भी छुप ना पाए||
बचपन में तो रो रो के सबको हम दिखलाएं |
अब रोना भी आ जाए तो कमरे में छिप जाए ||
बचपन में बोल बोलकर ज़िद पूरी करवाए|
अब बोलना चाहे तो शर्म हमे रुकवाएं||
बचपन में सोचते थे बड़े होकर कुछ बन जाए |
कुछ बन गए हैं तो सोचते हैं बस इतनी ही है मेरी आय?
- आस्था कोहली


