तू क्रोध कर नया शोध कर  ,तू आगे आ चल वोट कर तू दिल्ली का संग्राम है , तू गुजराती मैदान है, तू ही यू.पी का कर्ता है, तू हिमालयी पैगाम है, तू संसारी विरोध कर,  तू आगे आ चल वोट कर. तू राजा इस संग्राम का, तू ही रचिया इस धाम का, तू शेरो में सवाशेर खड़ा, तू दर्पण सच्चे ज्ञान का, इन रंको मे अवरोध कर, तू आगे आ चल वोट कर. तू घर से आकर बाहर निकल, तू बोल वचन से आज संभल, तू सच का अंतर समझ गया, तू आगे बड़ बदलेगा कल, तू हर विवरण का बोध कर, तू आगे आ चल वोट कर.