कारी अंखियों की कारी रतियां
कारे सपनों की कारी निंदिया
अंधी रात के कोयले में ख़्वाब जलाए
जले जले सपनों की कड़वी हवाएं
सूखे फूलों की सुखी पतियाँ
सूखे आंसू है, सुखी नदियां
जलते मौसम बुझे न बुझाए
सूखे पसीनों की कड़वी हवाएं
समन्दर सारा गाँव बहाए
पेड़ों बिन गुम है छाँव के साये
सूरज जले , तो दिन चले
जलते बादल, आग के ज़ाये
जले हुए फूलों की कड़वी हवाएं


