Kadvi Hawa
सूरज है रूठा रूठा
बादल है झूठा झूठा
बरसेंगी ख्वाहिशें
जब तारा कोई टूटा
दिल टूटे , बदरा न रोए
आँखे झुलसे, सूरज न सोए
कड़वी हवा है साँसों में
ज़िंदा शहर है लाशों में
अम्बर धरती पर कूदा
बरसेंगी ख्वाहिशें
जब तारा कोई टूटा
गाँव दौड़े शहर शहर
सपने अपने जीने को
साहिल तोड़ दरिया भागे
सारा शहर ही पीने को
रातें डूबी डूबी
दिन भी डूबा डूबा
ज़मीं के सीने तपता खंजर
पेड़ों को किसने है लूटा
सूरज है रूठा रूठा
बादल है झूठ झूठा
चारों तरफ है कड़वी हवा
तपती धरती अँधा कुआँ
पानी में डूबा सारा जहाँ
जहरीला धुआँ ही धुआँ


