●आसमां●


आसमां की ओर निकला,

लेके ख़्वाबों भरा थैला,

अनगिनत थे ख़्वाब जिसमें

थोड़े उसके,थोड़े अपने

मन भी हर्षित हो रहा था

आसमां की सैर करके,

गिर भी जाऊं गर धरा पर

गम नहीं बस हर्ष इसमें,

हर्ष है ये इसलिये,

कि उड़ना मुझे भी आ गया,

नभ की ऊँचाइयों संग,

ख्वाबों को जीना आ गया

खूबसूरत इतनी ही दुनिया भी अपनी है यहाँ,

थैला उठाओ चल पड़ो

हिम्मत रखो आगे बढ़ो,

देखना तुम एक दिन 

थोड़ा कहीं पर ठहरकर

नदियाँ, समंदर तैर कर

यूँ ही बढ़ते जाओगे

नभ की इन ऊँचाइयों पर

विजयपताका फहराओगे,