सानेहा में है,जीस्त आहों में है
दर्द जो है निहाँ वो चाहों में है
है परेशां सभी ये सोच कर, कि
कौनसे मोड़ उनकी राहों में हैं?
लूँ मैं किस ओर ये मेरी कश्ती?
दूर तक दरिया ही निगाहों में है
कैसे फिर नींद मुझको आएगी?
आँख गर दिल की ही पनाहों में है
डर हो किस बात का उसे,जिसके
जिंदगी दिल में,मौत बाहों में है