हर एक पंछी का शज़र हो, क्या ज़रूरी है मेरे हिस्से में भी घर हो, क्या ज़रूरी है मैं जहाँ, जिस हाल में हूँ, रहने दो मुझे तुमको भी मेरी ख़बर हो, क्या ज़रूरी है लोग कहते हैं दिवाना, मारते - पागल समझ कर तेरे हाथों में भी पत्थर हो, क्या ज़रूरी है मौत तो आकर रहेगी, आना होगा जब उसे पर तेरा खंज़र, मेरा सर-हो, क्या ज़रूरी है