चाँद की याद में मोहब्बत सितारों से कर बैठे
समंदर को चाहकर नफरत लहरों से कर बैठे
जो ज़ुबाँ ना कह सकी हम इशारों से कर बैठे
तेरी बातें तुझसे नहीं अपने यारों से कर बैठे
तेरे वास्ते अब दुश्मनी हम हजारों से कर बैठे
खुद वीरान थे मगर दोस्ती बहारों से कर बैठे
बदसूरत थे प्यार हुस्न के अमीरों से कर बैठे
हम ठहरे गरीब वो चाहत दिनारो से कर बैठे
तुझे पाने की दुआ कितने फक़ीरो से कर बैठे
हाथ नहीं थे और ख्वाहिशें लकीरों से कर बैठे
-ASJ


