जिसके लिए में शायरी लिखती हूं,

वोह पढ़कर क्या सोचता होगा।

मुझे उससे कितना प्यार है,

क्या वोह यह जानता होगा।

उसी के यादों मे ही,

दिन ढल जाता है।

हर सुबह सबसे पहले,

एक वोह ही याद आता है।

हर पल मै बस उसी की बातें करती हूं,

हर लम्हा मै उसी के खयालों में रहती हूं।

अब संभलना भी खुदको मुश्किल हुआ है,

आ जाओ मेरी ज़िन्दगी में,

दिल से तुम्हारा, मेरे दिल में इंतजार हो रहा है।