यह दिल भी क्या चीज है,

इसे कभी समझा ही नहीं था,

टूटे दिलों की दास्तां को,

कभी महसूस ही नहीं किया था,

वक्त आज हम पे आ रुका है,

दिल टुकड़ों टुकड़ों में बटकर,

सौ हिस्सों में जो बिखर गया है,

ना होती यह मोहब्बत,

ना होती यह चाहत,

और ना होती कोई आरज़ू,

तो ना होती कोई शिकन,

दिल टूट भी जाता अगर,

ना महसूस हो पाती कोई कमी,

अब वो ही नहीं है ज़िंदगी में,

जो थी ज़िंदगी थी हमारी,

गमों का तो पता नहीं,

आंसू बहकर कुछ कह रहे है,

कुछ खोया सा लगता है,

पहेली बार यह दिल रोया सा लगता है,

हार गया दिल, प्यार के सामने,

इस बात का जख्म दिल में,

आज भी ताजा सा लगता है।