प्रीत को हम तुम्हारी यूं तकते रहे

कुछ अनकहे भावों के संग भटकते रहे

तुम बिना कुछ कहे चली तो गयी

हम तुम्हे देखने को तरसते रहे,,,


'अश्वनी सोनी'