सफर की शुरूआत हो गई
मुकम्मल तेरी चाहत हो गई
आरजू तमन्ना ख्वाहिश ख्वाब हो गई
कठिन परिश्रम ही सफलता की पहचान हो गई
सफर की शुरूआत हो गई
रात-दिन,सुबह-शाम एक हो गई
हर वक्त मंजिल की राह हो गई
बदलता मौसम बदलता आत्मविश्वास है
डगमगाते कदम भटकाते असुर आसपास है
सफर की शुरूआत हो गई
आज बिन मौसम बरसात हो गई
न जाने कब सुबह से शाम हो गई
वक्त बेवक्त आई मुसीबत भी क्या असर करती है
माथे पे सिकन,चेहरे पे दर्द बया करती है
सफर की शुरूआत हो गई
हर कक्ष पे भ्रष्टाचार की बात हो गई
ना रूकना मुमकिन हुआ ना रोकना मुमकिन हुआ
असर भी बेअसर हो गई
गरीबो की सांसे बेचैन,अमीरो की राहत हो गई
सफर की शुरूआत हो गई
मुश्किल से भरी,हर आवाज हो गई
मंहगाई भरी इस दुनिया मे
गुनेहगारो की वाह वाह,बेगुनाहो की तबाही हो गई
हा, सफर की शुरूआत हो गई ।