कविता's image
Share0 Bookmarks 62722 Reads1 Likes
यह प्रेरणा है, यह भाव है।
जीवन में लगी चोटों का, भर देता यह हर घाव है।
मानव जीवन की गाथा यह, और उसका बर्ताव है।
जेठ की तपती दुपहरी में , पीपल की शीतल छांव है।

यह प्रेम सुधा , यह रोष अनंत।
इसका ना कोई आदि ना अंत।
इसके प्रभाव से जग बदला,
बने कितने काज़ी व संत।

सुख में हो कोई या दुख में,
हर मानव मन को यह भ

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts