न दिन कट रहें हैं , न ही ये हसीं रातेंतन्हा में अक्सर ख़ुद से करता फिर रहा बातें।आज फ़िर एक बार.......तुम्हारे ही इंतज़ार में शाम ढल रही ,कुछ इस क़दर ज़िन्दगी तमाम हो रही।।
न दिन कट रहें हैं , न ही ये हसीं रातेंतन्हा में अक्सर ख़ुद से करता फिर रहा बातें।
आज फ़िर एक बार.......
तुम्हारे ही इंतज़ार में शाम ढल रही ,कुछ इस क़दर ज़िन्दगी तमाम हो रही।।