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इंतज़ार


न दिन कट रहें हैं , न ही ये हसीं रातेंतन्हा में अक्सर ख़ुद से करता फिर रहा बातें।

आज फ़िर एक बार.......

तुम्हारे ही इंतज़ार में शाम ढल रही ,कुछ इस क़दर ज़िन्दगी तमाम हो रही।।

— आशुतोष
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