जब विश्वास पर आस्था भारी हो,जब हर कही बेकारी व लाचारी हो,मुफलिसी मे ज़िन्दगी गुजारी हो,गाली-गलौज जनहित मे जारी हो,आतंक और खौफ की छाई महामारी हो,समझना जैसे वक्त के बदलने की तैयारी हो।
जब विश्वास पर आस्था भारी हो,जब हर कही बेकारी व लाचारी हो,
मुफलिसी मे ज़िन्दगी गुजारी हो,गाली-गलौज जनहित मे जारी हो,
आतंक और खौफ की छाई महामारी हो,समझना जैसे वक्त के बदलने की तैयारी हो।