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ज़िन्दगी


खुली सड़क पे, भरी दोपहरी

टहल रही है, ये ज़िन्दगी

बड़ी उम्मीदों, के बोझ ले के

बदल रही है, ये ज़िन्दगी

@अशरफ फ़ानी

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