ज़िन्दगी से पूछूँगा कभी
गर कहीं मिल जाये वो
तू कभी दिखती भी है
या की बस आभास है
तू कभी बुझती भी है
या की बस एक प्यास है
ज़िन्दगी से पूछूँगा कभी
गर कहीं मिल जाये वो
_अशरफ फ़ानी


ज़िन्दगी से पूछूँगा कभी
गर कहीं मिल जाये वो
तू कभी दिखती भी है
या की बस आभास है
तू कभी बुझती भी है
या की बस एक प्यास है
ज़िन्दगी से पूछूँगा कभी
गर कहीं मिल जाये वो
_अशरफ फ़ानी