अपने अतीत की सच्चाई से भागना चाहता हूँ ,
कसूर मेरा न होते हुए भी मैं उससे संबंध तोड़ना चाहता हूँ।
वो बेबसी अपनी होते हुए भी एक पराई जान पड़ती है,
पर उसकी दर्द भरी चीखें आज भी मेरे नजरों के सामने नाच पड़ती हैं।
काफ़ी आसान लगता है कहना कि - "भूलने में ही भलाई है"
पर शायद उस दर्द का दस्तक देती मेरी कलाई है,
जिसने उसे थामा औऱ उसके अकेलेपन को अपनाया ।
पर न जाने क्यों इतने करीब होते हुए भी मेरी उस अतीत से दूरी है -
शायद एक सुनहरे कल को यही जरूरी है ।

