
दग़ा की बात तो ये है, दग़ा हम भी नहीं करते,
सभी से आजकल लेकिन वफ़ा हम भी नहीं करते.
हमारी निभ नहीं पाती जगत के देवताओं से,
ये मुद्दा और है उनको ख़फ़ा हम भी नहीं करते.
मोहब्बत का तक़ाज़ा था नमाज़ी हो गए हम भी,
कसम लेलो कहीं यूँ ही झुका हम भी नहीं करते.
दुखी होता है वो मन में, हमेशा चोट पहुंचा कर,
पलट कर इसलिए शिकवा गिला हम भी नहीं करते.
बुरा लगता है बच्चे शाम को जब देर से लौटें,
उन्हें खुश देख कर लेकिन मना हम भी नहीं करते.
खुला रखत
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