सूरज सोचता था कि
वही सबसे ज्यादा गरम है
कई तप्त थे
जो इतना पसीना बहाते
कि सूरज जल भुन
पसीने पसीने हो जाता
सूरज सोचता अकेला वही चलता है
और सबसे लम्बी दूरी तय करता है
भीड़ में लोग निहायत एकाकी थे
जो एक लम्बी यात्रा पर निकल पड़े थे
सूरज सोचता कि एक दिन वह आ जायेगा
धरती के खूब करीब
और दोनों के बीच गर्म हवाओं और उच्छवासों के सिवा
कुछ न होगा
यहाँ लोगों ने गर्माहट बचा रखने के लिये
पर्याप्त दूरियां बना रखी थीं
सूरज एक आसमान चाहता था
खुद के चमकने के लिये
कई थे जो खुद के आकाश में
सूरज बन गये थे
बस एक बात अहम थी
जो सूरज के खिलाफ जाती
कि जब वह आराम की टोह में
शाम को थोड़ा जल्द निकल लेता था
थे अभी भी कई
जो मैदान में डटे हुए थे.


