चाॅद ढलने लगा रात खिलने लगी सितारो की आतिश होने लगी चादर बनके लिपट जाओ मुझसे, करवटो की गुजारिश होने लगी बन्द पलके किए मै खयालो मे था, बैचैनी की नुमाईश होने लगी दिल की सुनने को मै मजबूर था ,फरमाईश पे फरमाईश होने लगी अँगुलिया अँगुलियो को दबाने लगी, अरमानो की पैमाइश होने लगी हम बेखबर उसकी इस बात से, के मोहब्बत की आजमाईश होने लगी ना कोई राज धा ना कोई बात धी बेमौसम सी ये बारिश होने लगी ख्वाब मे  तुम जो आए नजर ,  फिर हसरतो की सिफारिश होने लगी