बेजान ख़त अहले इश्क़ में कुर्बान होते है,
इब्तिदा इश्क़ की पहली जुबान होते है
उल्फतो को यही मिलती ह जमीन ,
यही अरमानो के आसमान होते है
ख़त मोह्हबत के मकान होते है
इसी पे चलते ह दिली आरजू के तीर कमान,
यहीं दिलोदर्द के निशान होते है
ख़त ही शमा में जलकर परवान होते है,
खत हर ख्वाब की मुस्कान होते है
ख़त इब्तिदा इश्क़ की पहली जुबान होते है
ख़त देते है दिलीमोह्हबत को अजान,
यहीं होती ह मोह्हबत की दस्तक ख़त इम्तिहान लेते है ,
ख़त इत्मीनान देते ह,
ख़त मोह्हबत में दरबान होते है
यकीनन ख़त दिलबर की पहचान होते है ए दिलअज़ीज़ ,
ख़त इब्तिदा इश्क़ की पहली जुबान होते है