चेहरे बेरंग से है आखो पे शबनम है
रेख़्ता इस जहाँ में अब हज़ारो गम है
नीदो ने तलाशा जिसे ख्वाबो में तराशा उसे
हाथो में किस्मत की शायद लकीरे कम है
जलते है जिन्दा लोग ,चिंता के पेबंद है
देखा है इंसानो की उम्र बहुत कम है
मतलब से है वास्ता मतबल का है रिश्ता
मुव्वत मुशबाह है बनी मोहब्बत हुई बेशर्म है
एक तरफ है रंजिशे एक तरफ है साज़िशे
अमन नहीं समतो में , तादाद में बम है
महजबो का खेल यहाँ, नहीं दिलो में मेल यहाँ
मुस्तासल इंसानियत है अब मुस्तैद हरेक जुर्म है