उड़ते गुब्बारों से लबालब वो आसमान कहाँ है
हँसता खेलता अब वो इंसान कहाँ है
खुल्लमखुल्ला हँस खुल करके जी खुदा का बताया वो फरमान कहाँ है
चोकड़ी दोस्तों की और गुल्ले गालो के ठहाको से गूँज वाला मकान कहाँ है
तू अमीर है या घमचक्कर तेरे चहरे पे हँसी का निशान कहाँ है
होठो पे सच्चाई और दिल में सफाई गुम वो तेरी असल पहचान कहाँ है
ला दफन कर दू तेरे हिस्से की नाराज़िया बता तेरे मोहहले मै ऐसा श्मशान कहाँ है
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सब पीते पानी नुक्कड़ पे अब ठंडा मर्तबान कहाँ है
गली गली चिराग लिए फिरता है
ये " दिले अज़ीज़" लहराते खेत खिलते बागान वो मीठी जबान कहाँ है