बुर्ज़ पे बाज़ कोई बैठा हुआ है माहौल सरहदों का ऐठा हुआ है ठप्प हो गयी दुकानदारी नाराज़गी से  चीनी इसी बात पे चेटा हुआ है
सिल्क रुट रोड सब बेकार है विश्वास सबका उससे टुटा हुआ है हश्र है दुश्मनो को शय देने का चेहरा चीटीओ ने चूटा हुआ है मेरे शेर सब कच्चा ही चबा जायगे इन्होने हर मुसीबत को कूटा हुआ है न पटको पैर न खिजियाओ देखकर हर कली -बूटे को प्यार से गूथा हुआ है सियासत की दुनिया में तुम पियादे ही हो अब हर ऊट मेरी करवट ही बैठा हुआ है