बेहतर है अदब बेहोश रहे, जग गया तो बयान मांगेगा सल्तनत के बस मे नही, वो रोटी कपड़ा मकान मांगेगा
हुक्मरानो ने किये थे वायदे , सूरज चाॅद पर घुमाने के होश मे आ गया आवाम, फिर उनसे दीवान मांगेगा
जमीन पे लथपथ पड़ा ,है जो पड़ा रहने दो लग गए पर तो उड़ने के लिए आसमान मांगेगा
पढाई लिखाई काम धन्धा सब चौपट है निकल गया घर से तो हक हर नौजवान मांगेगा
किसी ना किसी नशे से रखो जिन्दा मरा हुआ इन्सान भी श्मशान मांगेगा
कोई न कोई अफवाह हो आबो हवा मे नही तो हसी खुशी के वासते सामान मांगेगा
अच्छे दिन आएगे जरूर ये मुगालता रहे अगर ठनक गया जवाब सारा हिन्दुस्तान मांगेगा


