है ये साया धूप का, या की गहरे दाग़ हैं
फिर लगी एक आग है, फिर लगी एक आग है
जल रहा है शहर ये, लब पे हर फ़रियाद है
फिर लगी एक आग है,फिर लगी एक आग है
क़त्लखाने उनके ही, जिनके सर पे ताज है
फिर लगी एक आग है,फिर लगी एक आग है
है तरक़्क़ी हर जगह, बेतुकी सी बात है
फिर लगी एक आग है, फिर लगी एक आग है
दोष किसका है यहाँ, नस्ल जो बरबाद है
फिर लगी एक आग है,फिर लगी एक आग है
हम पे है इल्ज़ाम ये, बोलते बेबाक़ हैं
फिर लगी एक आग है,फिर लगी एक आग है
प्रकाश आशीष