इस शहर में मेरे जैसा ही इक परिंदा मिला सदियों बाद मुझको मैं ही सामने ज़िंदा मिला   बोल बैठा भाई मिला कुछ क्या चुगने वास्ते मीलों उड़ता हूँ मैं भूखा, चौड़े सारे रास्ते   कोई सीधा न धरे, न कौर देहरी रखता है भूँका परिंदा बेचारा बेआस सबको तकता है   कहता तुम भी आए हो क्या पास के किसी गाँव से रंग गहुआं हो गया जबसे हो बिछड़े छांव से   दाना पानी के लिए तुम दूर कितने आ गए अपने हिस्से के निवाले, गिद्द कौए खा गए