रात कल फुटपाथ पे कुछ ग़रीब खो गए
ऊँची मंज़िलो में लगता लोग सारे सो गए
रात भी वीरान सी,भौंकने का शोर बस
निगरानियो पे शुक्र है, गली के कुत्ते तो गए
इस शहर में रात भी रंगीनिया सी दिखती हैं
लौट के न आए वो, उन गलीं में जो गए
आज काली रात है, और सियासत सो रही
कल पढ़ेंगे रात कल, जुर्म क्या क्या हो गए
सरहदों के नाम पर, सरहदें तो ख़ूब हैं
सरहदों के नाम पर, सरहदें तो ख़ूब हैं
सरहदों पे जो गए सरहदों में खो गए