प्रेम मेरे लिए क्या है
ये रेशमों की डोर है
व्यर्थ सारा शोर है
दिनो की सीमा है नहीं
ये प्रेम चहुँ ओर है
कृष्ण बनसी में बजे
मीरा के विष में भी सजे
राधा नयन की आस है
और उधौव की प्यास है
वही तो माखन चोर है
ये प्रेम चहुँ ओर है
सीता के प्रति राम की
नयनों से झाँकती हुई
वो वाटिका प्रसंग है
युगों से प्रेम संग है
वर्षा में मगन मोर है
ये प्रेम चहुँ ओर है
लखन के भात्र मोह में
भरत के राज द्रोह में
संजीवनी तलाश में
हनुमान के विश्वास में
निस्वार्थ लखन वनवास में
और उर्मिला की आस में
ये हर निशा की भोर है
ये प्रेम चहुँ ओर है
आशीष प्रकाश