नोटबन्दी को हुई गवा, देखो तो एक साल
कोई मन्त्री नहि सुने, हम जैसन का हाल
NDTV कहे रहा, लाइन मे मर गये लोग
ज़ी NEWS कि मानो तो ऐसा ,जैसे बटता भोग
बटुआ मे हम भरत रहे सिर्फ ,१०० रुपिया का नोट
एक एकाकि झेलत रहा, सब कुन्ड्बे का बोझ
फिर दरस दीन नोट गुलाबी, २००० बा को नाम
छुट्टे बिन कहु न चले, सडत रहा बिन काम
देस बिदेस मे खूब मचा, नये नोट का रास
बोले नोट मे हो गया, चिप माता का वास
२०० के नोटन ने भी सुन लो खूब मचाई धूम
हालांकि हम आज भी रहे, उन नोटन को ढून्ढ
फिर एक अकेले पच सउअन पे, आन पडा सब भार
नोटबन्दि का बस यहि रहा, साल भर का सार


