कल मण्डी कोहराम मचा था
किसी ने खेल तमाम रचा था
चाय वाला एक नया था आया
साथ में बिस्किट फेनी लाया
दुकान पे उसकी भीड़ बहुत है
उसमें अक़्ल और धीर बहुत है
सबके स्वाद को वो जाने है
और कुछ मन में भी ठाने है
कहता है इंसाफ़ करेगा
और दुकाने साफ़ करेगा
और दुकाने सन्नाटा है
ग्राहक को भी समझाता है
चाय वो बदल बदल लाता है
हर सीज़न हिट हो जाता है
सुबह से लेकर शाम मचा था
कल मण्डी कोहराम मचा था
चाय पे चर्चा ख़ूब कराए
सबको अपना स्वाद चखाए
सबको अपने वश में रखता
और तीर कई तरकश में रखता
किसी किसी को तीखी देता
कुछ कहते की फीकी देता
सबकी चीनी पहचाने है
और चीन को भी जाने है
सब देशों की चाय है देता
विदेश को अच्छी राय है देता
गले मिला के बाट रहा है
पाक की पत्ती काट रहा है
चीन की पत्ती कहता काली
अरुणाचल भी चाय दे डाली
चाय में कहते जोश बड़ा है
पीले जो भी रोष भरा है
दुश्मन संग संग्राम मचा था
कल मण्डी कोहराम मचा था
वहाँ एक लड़का काम करे है
तरह तरह के स्वाँग करे है
सबको ऐसे टोह लेता है
सबको बस वो मोह लेता है
मण्डी में वो मेल बढ़ाए
तोड़ तोड़ के ग्राहक लाए
कभी दूध का माप बढाता
कभी वो अदरक ढूँढ ले आता
कूटनीति भी करता जाए
कूट के अदरक भरता जाए
दूध कभी ना फटने देता
ग्राहक को न हटने देता
रूख मण्डी का मोड़ चुका है
कई दुकाने तोड़ चुका है
जाने सारा घोटाला है
पर वो चाय का रखवाला है
चाय वाले की जान है उसपे
चाय का सब सामान है उसपे
इतना उसको काम बचा था
कल मण्डी कोहराम मचा था
अब मण्डी कुछ और नहीं है
चाय वहीं है शोर नहीं है
दुकाने सारी सिमट चुकी हैं
रेडी ट्ठिलिया भी हट चुकी हैं
देखो हौले हौले करता
पूरी मोनोपोली करता
इक दिन तखती टाँग रहा था
हज़ार की पत्ती माँग रहा था
लोग भी उसको भर भर देते
कई कहीं तो मर कर देते
सबको सपने भी दिखलाए
पर अपनी ना चाय बताए
चाय का सब पे नशा था भारी
सब चल रहा था बिन तैयारी
नहीं किसी को माफ़ था करना
काली चाय को साफ़ था करना
पर उसकी चाय पियत सभी हैं
लगता उसकी नियत सही है
चाय का शायद दाम बचा था
कल मण्डी कोहराम मचा था