न जाने क्या हुआ, क्यू अब ये दस्तूर हो गया जितना भी पास आया तेरे और भी दूर हो गया वस्ल कि कीमत अदा कुछ यू कि है कि अब दीवानो कि बसतियो मे मशहूर हो गया जब तलक होश मे रहा मैं पागल हि रहा अक्ल तो तब मिलि जब नशे मे चूर हो गया महफिलो मे रहा तो बस चिराग बन कर उजाले दे सकु तो जलने को मजबूर हो गया आइनो से तो तेरी यारिया बहुत पुरानी थीं ? क्यू अब मुझे भी सवरने का फितूर हो गया? तेरे नाम‌ के ताने कुछ यू चुभे मुझे कि अपने नाम‌ पे भी अब गुरूर हो गया न जाने क्या हुआ, क्यू अब ये दस्तूर हो गया जितना भी पास आया तेरे और भी दूर हो गया आशीष प्रकाश