मैं अकेला चल रहा था, रास्ते मुश्किल बड़े हो गया आसान सब जब थे सफ़र में तुम खड़े मंज़िले धुँधली सी थीं और राह भी अनजान सी दे दिया जो हाथ तुमने, सारा परबत तब चढ़ें कोशिशें तब भी थी उड़ने की इसी आकाश में थे तुम्हीं जिसने बताया, हम धरा पे हैं पड़े आज दुनिया से झगड़ने की जो हिम्मत साथ है वो तुम्हीं थे, मेरी ख़ातिर इस जहाँ से थे लड़े मैं अकेला चल रहा था, रास्ते मुश्किल बड़े हो गया आसान सब जब थे सफ़र में तुम खड़े