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मेरे शिक्षक मेरे साथी

मैं अकेला चल रहा था, रास्ते मुश्किल बड़े हो गया आसान सब जब थे सफ़र में तुम खड़े मंज़िले धुँधली सी थीं और राह भी अनजान सी दे दिया जो हाथ तुमने, सारा परबत तब चढ़ें कोशिशें तब भी थी उड़ने की इसी आकाश में थे
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