मेरे शहर में मुझे पुराना क्यों न वो शहर सा दिखता है मेरी ही तरह इसपर भी, एक तरक्की का असर सा दिखता है मंज़र बदल गये वो सारे जिनमे बचपन बीता था धुएं धुएं सा शहर हुआ, मैं तो खुली सांस ले जीता था रिकशे, टाँगे, इक्के मेरे कहाँ खो गए जाने अब लेके अब जो कार न निकलो, देते सब क्यों ताने अब इमारते पुरानी भी सब बदल गयीं, सब कुछ बदला दिखता है वजह तरक्की ही है शायद, अब कंडा भी यहाँ बिकता है टॉकीज़ पुरानी ख़तम हुई अब मॉल खड़ा वहां चौड़ा है २० के आगे २०० की टिकट का उन्माद पर बहुत ही थोड़ा है झुकी गर्दनो का बोझ पर अवाम की गुज़र बसर पर दिखता है मेरी ही तरह इसपर भी, एक तरक्की का असर सा दिखता है